Wednesday, 17 June 2020

Jaundice ( पीलिया)

पीलिया


जब रक्त में बिलीरुबिन का स्तर बढ़ जाता है तब मानव शरीर में कुछ परिवर्तन देखने को मिलता है जैसे त्वचा, आंख, नाखून का पीला हो जाना, त्वचा में खुजली होना, मल एवं पेशाब का रंग गहरा पीला होना, इसके साथ साथ पेट के दाहिने हिस्से में दर्द होना, खून की कमी हो जाना जिसके कारण थकान महसूस होना एवं सांस लेने में तकलीफ होना, वजन कम हो जाना, भूख ना लगनाआदि लक्षण देखने को मिलते हैं जिसके परिणाम स्वरूप डॉक्टर लिवर फंक्शन टेस्ट (LFT) या बिलीरुबिन की जांच के लिए लिखते हैं जिससे मरीज में पीलिया की पुष्टि होती है।
आधे से अधिक शिशुओं में जन्म के बाद पहले सप्ताह में पीलिया का स्तर बढ़ा हुआ होता है। अगर शिशुओं में पीलिया लंबे समय तक बना रहता है तो करनिक्टरस नामक बीमारी होने का खतरा रहता है जो मस्तिष्क से संबंधित बीमारी है ।

Gall bladder with stones

पीलिया को 3 भागों में बांटा गया  है -

1) - Prehepatic / Hemolytic Jaundice
2) - Hepatic / Hepatocellular
3) - Post Hepatic

1) - Prehepatic / Hemolytic Jaundice - prehepatic  jaundice उन सभी कारणों से हो सकता है जिससे लाल रक्त कोशिकाओं का नाश या हीमोलिसिस होता है। रक्त में उपस्थित हीम नामक पिगमेंट के नष्ट होने से रक्त में अनकांजुगेट बिलिरुबीन की मात्रा बढ़ जाती है जो कि Prehepatic / Hemolytic Jaundice के लिए उत्तरदायी है। उष्ण कटिबन्धीय देशों में गम्भीर मलेरिया की वजह से भी पीलिया होने का खतरा होता है जबकि कुछ आनुवांशिक बीमारिया जैसे सिकल सेल एनीमिया, थेलेसीमिया, G6PD deficiency इत्यादि।

2) - Hepatic / Hepatocellular Jaundice -
यह एक्यूट या क्रोनिक हिपेटाईटिस, हपेटो टाक्सिटी, सिरोसिस, ड्रग इन्ड्यूस हिपेटाईटिस, एल्कोहालिक लीवर डिसीस के कारण होता है। इसका दूसरा मुख्य कारण है प्राइमरी बिलियरी सिरोसिस जो प्लाज्मा में अनकांजुगेट बिलिरूबिन के स्राव को बढ़ा देता है।

3) - Post Hepatic Jaundice -
इसको आब्सट्रक्टिव जांडिस के नाम से भी जाना जाता है।
जब पित्त नली में किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न हो जाती है जैसे पित्ताशय में पथरी बन जाना। अगन्याशय का कैंसर,लीवर फ्लक्स नामक पैरासाईट की वजह से भी पीलिया या आब्सट्रक्टिव जांडिस हो जाता है।
Symptoms of jaundice

Diagnosis -
   A)     Bilirubin T/D or
   B)     Liver function test (LFT),
   C)     PT INR,
   D)    HbsAg,
   E)     HCV,
   F)     Urobilinogen test of urine


Normal value of bilirubin -

A) In normal adult - 0.2 - 1.0 mg/dl
B) new born baby - 1.0 - 12.0 mg/dl

Prehepatic/unconjugate/ indirect bilirubin - 0.2 - 0.8 mg/dl

Post hepatic/conjugate/direct bilirubin - 0.1 - 0.4 mg/dl

Hepatic or critical value of bilirubin  -

A) In Adults - upto 12 mg/dl
B) In new born baby - upto 15 mg/dl



                        Thank you

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Monday, 27 January 2020

Liver Function Test (LFT)

Liver Function Test

यकृत मानव शरीर की सबसे बड़ी ग्रंथि है। इसका वजन 1. 5 से 2.0 किलोग्राम के मध्य होता है। यह उदर गुहा (abdominal cavity) के दाईं ओर डायफ्राम से लगा होता है। इसका रंग गहरा भूरा (dark brown) होता है । इसके निचले भाग में एक छोटी सी थैली होती है जिसे पित्ताशय (gall bladder) कहते हैं यकृत द्वारा स्रावित पित्त रस (bile juice) पित्ताशय में एकत्र होती है । पित्त (bile) आंत में उपस्थित एंजाइमों की क्रिया को तीव्र कर देते हैं।

यकृत के कार्य -
1) - पित्त का निर्माण करना एवं स्रावन करना।
2) - ग्लूकोज का संश्लेषण करना ।
3) - विटामिन का संश्लेषण करना।
4) - ड्रग detoxification का कार्य करना।
5) - चयापचय की क्रिया को करना आदि।

जब किसी मरीज में कुछ लक्षण देखने को मिलते हैं जैसे पेट में दर्द, पेट का फूलना, पेट में मरोड़ होना, कमजोरी और थकान, वजन में कमी आना, मतली होना, उल्टी होना, त्वचा पीला हो जाना, आंखों का पीला हो जाना, भूख ना लगना जैसे पाचन तंत्र की अनेक समस्या देखने को मिलती है तब डॉक्टर लिवर फंक्शन टेस्ट के लिए एडवाइस करता है।

लिवर फंक्शन टेस्ट में होने वाली जांचे -

         Tests             Normal Values

1) Bilirubin - Total (0.3 - 1.0 mg/dl)
                        Direct (0.0 - 0.4 mg/dl)
                        Indirect (0.2 - 0.8 mg/dl)
Bilirubin  मुख्यता पीलिया के लिए उत्तरदाई होता है।

2) SGPT (0 - 45 IU/L)
3) SGOT (0 - 40 IU/L)
4) Alkaline phosphatase (44 - 147 IU/L)

5) Total Protein (6.0 - 8.3 gm/dl)
6) Albumin (3.4 - 5.4 gm/dl)
7) Globulin (2.0 - 3.5 gm/dl)
8) A:G Ratio (1.2 : 1.4 Ratio)

9) Prothombin Time (10 - 12.5 sec)
10) Blood Ammonia (11 - 32 umol/L)

अंतिम दो जांच सामान्यता लिवर प्रोफाइल में नहीं की जाती है।
                         धन्यवाद।।



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Tuesday, 17 December 2019

Culture Media Definition and Types in Hindi




कल्चर मीडिया एक ऐसी विधि है जिसमें इंफेक्शन फैलाने वाले जीवाणु और कवक आदि की क्रिम विधि द्वारा वृद्धि किए जाते हैं।
जिस प्रकार एक किसान खाद पानी और उचित वातावरण देकर फसल की वृद्धि करता है ठीक उसी प्रकार प्रयोगशाला में तंबाकू तकशियन कुछ इनफेक्शियस सैंपल जैसे रक्त, पेशाब, मवाद इत्यादि को लेकर उसे उचित पोषक तत्व और वातावरण प्रदान करके सूक्ष्म जीवों की वृद्धि कराकर उसका डायग्नोसिस करते हैं। हैं और फिर उसका ड्रग सेंसिटिविटी टेस्ट लगाते हैं। कल्चर मीडिया के प्रकार - कल्चर मीडिया को विभिन्न प्रकार में विभाजित किया गया है जो निम्नलिखित है - 1) भौतिक स्थिति के आधार पर कल्चर मीडिया को तीन भागों में विभाजित किया गया है ) ए सॉलिड मीडिया बी) सेमी सॉलि'ड मीडिया सी) लिक्विड मीडिया।










2) मीडिया में उपस्थित ऑक्सीकारक और अपचायक तत्वों के आधार पर मीडिया को दो भागों में विभाजित किया गया है
) ए एरोबिक मीडिया
बी) एनएंडिनिक मीडिया 3) पोषक तत्वों के आधार पर मीडिया को तीन भागों में बांटा गया है  ) सिम्पल मीडिया  b) सिंथेटिक मीडिया और  c) विशेष। विशेषण मीडिया के अंतर्गत छह प्रकार के मीडिया आते हैं - a) समृद्ध मीडिया b) समृद्ध मीडिया c) चयनात्मक मीडिया d) विभेदक मीडिया e) संकेतक मीडिया f) परिवहन मीडिया। a) सिंपल मीडिया - न्यूट्रिएंट ब्रोथ इसका सबसे अच्छा उच्छेद है। यह पेप्टन पानी और 1% मांस निकालने के मिश्रण से बना होता है। यदि न्यूट्रिएंट ब्रोथ में हम ग्लूकोज को मिला देते हैं तो यह मिश्रण ग्लूकोज ब्रोथ मुझे बदल जाता है।



















बी) सिंथेटिक मीडिया - यह मीडिया पूरी तरह से रसायनल्स से बनाया जाता है इसका प्रयोग विशेष स्टडी में करते हैं - जैसे डुबो का माध्यम ट्वीन 80 के साथ।


ग) विशेष मीडिया - 1 - समृद्ध मीडिया - जब बेसल मीडियम में कुछ पोषक तत्व जैसे रक्त, सीरम और अंडे इत्यादि को मिला देते हैं तो यह मीडियम एनरिच मीडिया कहलाती है। उदाहरण - ब्लड अगर, लोफर्स सिरम आदि।




2 - समृद्ध मीडिया - कुछ लिक्विड मीडियम में ऐसे तत्व पाए जाते हैं जो जीवाणु के वृद्धि दर को उत्तेजित करते हैं साथ ही अन्य विरोधी जीवाणुओं की वृद्धि को निष्क्रिय करने की भी प्रवृत्ति रखते हैं जिनकी वजह से हमें वही जीवाणु प्राप्त होते हैं जिनके स्ट्रेन हमें होते हैं। होना चाहिए ऐसे मीडियम को एनरिचमेंट मीडिया कहते हैं। 3 - सेलेक्टिव मीडिया - यह एक ठोस मीडिया है जिसमें कुछ विशेष प्रकार के जीवाणुओं की ही वृद्धि होती है। ऐसे तत्व उपस्थित रहते हैं, जो अन्य जीवाणुओं को बढ़ाने के लिए नहीं देते हैं। इस प्रकार में एक ही प्रकार के जीवाणुओं की वृद्धि होती है। इस मीडिया के उदाहरण हैं - डीऑक्सीकॉलेट सिट्रेट अगर (डीसीए), बाइल साल्ट अगर (बीएसए)। 4 - विभेदक मीडिया - जब किसी मीडियम में उपस्थित तत्व की सहायता से हम किसी बैक्टीरिया के चरित्र को डिफरेंशीएट कर सकते हैं तो ऐसे मीडियम को हम डिफरेंशियल मीडिया कहते हैं जैसे मैक्कोंकी अगर।




मैककंकी अगर में दो तरह के कलर दिखने आते हैं तो एक गुलाबी रंग का जिसे हम लैक्टोज फरमेंट (LF) कहते हैं और दूसरा नॉन लेक्टोज फर्मेंटे (NLF) होता है जिसमें कोई भी कलर नहीं आता है।


5 - संकेतक मीडिया - इस प्रकार के मीडिया में कुछ ऐसे तत्व होते हैं जो इंडिकेटर का काम करते हैं जब बैक्टीरिया वृद्धि करते हैं तब मीडिया का कलर चेंज हो जाता है। उदाहरण विल्सन एंड ब्लेयर मीडिया, मैकोनी अगर।
सालमोनेला टायफी विल्सन एंड ब्लेयर मीडियम में जब वृद्धि करते हैं तब मीडिया अपना रंग चेंज करके काले रंग ले लेती है।


6 - परिवहन मीडिया - इस मीडिया का प्रयोग हम तब करते हैं जब हमें किसी कमजोर और संवेदनशील बैक्टीरिया की वृद्धि करनी होती है (जैसे - गोनोकोकी बैक्टीरिया) इनको एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाने में या किसी अन्य जीवाणुओं जो गैर रोगकारी हैं। पुनः वृद्धि प्रदान करने पर यह जीवित नहीं रहता है। (जैसे कालरा जीव)। ऐसे में परिवहन मीडिया का प्रयोग किया जाता है।
ट्रांसपोर्ट मीडिया का उदाहरण है - स्टुअर्ट का ट्रांसपोर्ट मीडिया।


 
                           धन्यवाद


प्रिय दोस्तों, 
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Monday, 18 November 2019

CBC Test (Complete Blood Count Test)




CBC एक नॉर्मल ब्लड टेस्ट है जिसका उपयोग शारीरिक स्वास्थ्य एवं अन्य बीमारियां जैसे एनीमिया, इंफेक्शन और ल्यूकेमिया आदि का पता लगाने के लिए किया जाता है।

इस टेस्ट में रक्त के विभिन्न तत्वों की जांच होती है जो निम्नवत है।
१) हीमोग्लोबिन
२) लाल रक्त कोशिका
३) श्वेत रक्त कोशिका
४) प्लेटलेट्स
आदि।

हमारा रक्त दो भागों से मिलकर बना होता है पहला भाग है द्रव, इसमें सिरम या प्लाज्मा होता है और दूसरा भाग है कोशिका, इसमें लाल रक्त कोशिका, श्वेत रक्त कोशिका एवं प्लेटलेट्स आते हैं।

श्वेत रक्त कोशिका में दो तरह की कोशिकाएं होती हैं-
१) Granulocyte- इस प्रकार की कोशिका में छोटे-छोटे ग्रेन्यूल्स होते हैं। यह तीन प्रकार की होती है पहला है न्यूट्रोफिल, दूसरा है स्नोफिल, तीसरा है बेसोफिल ।

२) Agranulocyte - इस प्रकार की कोशिका में कोई भी ग्रेन्यूल्स नहीं पाए जाते हैं। यह दो प्रकार की होती है पहला है लिमफोसाईट एवं दूसरा है मोनोसाइट।

सीबीसी के अंतर्गत आने वाले टेस्ट-

1) हिमोग्लोबिन- यह एक प्रकार की प्रोटीन है जो लाल रक्त कोशिकाओं में पाई जाती है यह कोशिका को लाल रंग प्रदान करती है इसका काम ऑक्सीजन का परिवहन करना होता है इसके सामान्य वैल्यू है -
 स्त्रियों में - 12 - 14 gm/DL
पुरुषों में - 14 - 16 gm/DL
नवजात शिशुओं में - 16.5 - 19.5 gm/DL

2) Total Leukocyte Count (TLC) - इसी को श्वेत रक्त कोशिका भी कहते हैं इसका हमारे शरीर को रोग  प्रतिरोधक क्षमता प्रदान करना होता है।
इसकी नॉरमल वैल्यू 4000 से 10000 cells/cub.mm

3) Differential Leukocyte Count (DLC)- इसमें श्वेत रक्त कोशिका के दो प्रकार की कोशिका ग्रेन्यूलोसाइट एवं एग्रेन्यूलोसाइट आते हैं जो निम्नवत है -

A) Neutrophil - इसके न्यूक्लियस में कई लोब होते हैं और इसमें पर्पल कलर के granules होते हैं इसकी नार्मल रेंज 48 से 70 परसेंट होती है

B) Eosinophil - इसके nucleus में दो लोब होते हैं इसमें लाल रंग के granules होते हैं इसकी नार्मल रेंज 1 से 6 परसेंट होती है।

C) Basophil - इसकी nucleus 8 के आकार की होती है इसमें नीले कलर के granules होते है इसकी नॉर्मल रेंज  0 se 1 प्रतिशत  होती हैं।

D) Lymphocyte -  इसका न्यूक्लियस बड़े से आकार का होता है जो कोशिका का अधिकतर भाग घेरा रहता है। इसमें किसी भी प्रकार के ग्रेन्यूल्स नहीं होते हैं। इसकी नार्मल रेंज है 25 से 40 प्रतिशत ।

E) Monocyte - इसका न्यूक्लियस बींस या किडनी के आकार का होता है इसमें भी किसी भी प्रकार का granules नहीं होता है। इसकी नार्मल रेंज 2 से  10 % होती है।

4 ) Total RBC count - यह लाल रक्त कोशिका होती है। जो ऑक्सीजन का परिवहन करती है। इस जांच से मनुष्य में लाल रक्त कोशिकाओं की संख्या कितनी है यह पता चलता है।
इसकी नॉरमल वैल्यू है-
 4.0 - 6.0 million cell / cub mm होती है।

5) Platelet Count - इस जांच से मनुष्य में प्लेटलेट्स की संख्या का पता लगाया जाता हैं। यह रक्त का थक्का जमने में सहायता करता है।
इसकी नॉरमल वैल्यू -
1.5 - 4.5 lac cell/cubic mm होती है।

6) HCT( Hematocrit) - इसको PCV पैक सेल volume भी कहते हैं। इसकी नार्मल रेंज -  36 - 46 % है।

 7) MCV (Mean cell volume) - इसकी नार्मल रेंज- 80 -100 fl है।

8) MCH ( Mean corpus haemoglobin) - इसकी नार्मल रेंज - 27 - 32 pg है।

9) MCHC ( Mean corpus haemoglobin concentration) - इसकी नार्मल रेंज - 32 -35 g/dl है।


10) RDW (Red cell distribution width) - इसकी नार्मल रेंज - 11.5 - 14.5 है।

ऊपर दी गई समस्त जांचें सीबीसी में किए जाते हैं।
ब्लड में उपस्थित कोशिकाये 


पहले सीबीसी की जांच मैनुअल की जाती थी जिसमें बहुत ज्यादा समय और बहुत सारे सामान और केमिकल लगते थे परंतु अब सीबीसी की जांच आधुनिक मशीनों सीबीसी एनालाइजरों द्वारा की जाती है जिससे समय की और काफी सारे सामानों की बचत होती है और रिपोर्ट भी जल्दी तैयार कर ली जाती है।
CBC Analyzer.


Note - अलग अलग Lab के अलग अलग normal range होते हैं। जिससे ऊपर दिए गए वैल्यू में हल्का फुल्का अन्तर हो सकता है।

                             
                                                 धन्यवाद।

Sunday, 16 September 2018

Reticulocyte Count Test




Introduction :- 
Reticulocytes young और immature red blood cells है जो की bone marrow से निकलते है जिसमे राइबोनुक्लिक  एसिड (RNA) और Ribosomes के अवशेष पाए जाते है। यह एक अपरिपक्व रक्त कोशिका है इसमें केन्द्रक (Nucleus) नहीं होता है। 


Principle :- 
ब्लड की कुछ ड्रॉप्स लेकर new methylene blue सलूशन में मिक्स करके incubate करते है जिससे RNA के granules लाल रंग की कोशिका के रूप  में stain हो जाते है। मिक्स सलूशन से  glass slide पर एक thin स्मीयर बनाते हैं और microscope के द्वारा reticulocyte  को count करते हैं।  Reticulocyte के संख्या को प्रतिशत में व्यक्त किया जाता है। 


Reagent :- New methylene solution निम्नवत  तैयार करते है  -

  1. New methylene blue - 1 gm 
  2. Sodium Citrate  - 0.6 gm
  3. Sodium Cloride - 0.7 gm
  4. Distilled Water - 100 ml
Reagent को रेफ्रिजरेटर में 2 - 6 digree celcius temprature पर रखना चाहिए और उपयोग करने से पहले इसे छान लेना  चाहिए। 


Procedure  :-  
  1. सबसे पहले एक साफ़ और सूखा टेस्ट ट्यूब लेते हैं  और उसमें 1 - 2 drop EDTA blood sample लेते हैं । 
  2. अब इसमें 1 - 2 drop New methylene blue के add करते हैं  और इसे अच्छे से मिक्स कर लेते है। 
  3. अब इस मिक्सचर को 15 मिनट तक रूम टेम्प्रेचर पर incubate करते है। 
  4. Incubate होने के बाद एक ग्लास स्लाइड पर इसकी एक thin smear बनाते हैं।  ( जिस प्रकार लिशमैन स्टैनिंग के लिए स्मीयर बनाते है उसी प्रकार) Making Blood Smear.
  5. स्मीयर जब सूख जाता है तब उसे माइक्रोस्कोप के द्वारा examine कर लेते  हैं।  

Reporting the Result - 
  
  Reticulocyte % = NR X 100 / NRBC
    
 NR =  No. of Reticulocyte counted.                   NRBC = No. of RBC counted. 



Referance Range :-   
                                      0.5% - 2.5%



Thank you. 
















Monday, 25 September 2017

Making Blood Smear


Blood Smear - Blood Smear का प्रयोग CBC, PBS(Peripheral Blood Smear)/GBP(General Blood Picture) MP (Malaria Parasite) For Slide इत्यादि में किया जाता है।


Preparation of Blood Smear (ब्लड स्मीयर बनाने की तैयारी) –
Requirements (आवश्यक सामग्री) –
1)  Clean glass slide 
Glass Slide
2) Smooth edge spreader
3) Micro pipette with tips
Micro pipette
4) Cotton
5) Glass marking pencil
Procedure (Smear बनाने की विधि) –
  • सबसे पहले एक ग्लास स्लाइड लेते है और उसे काटन से साफ करते है।
  • अब माइक्रोपिपेट की सहायता से स्लाइड के एक सिरे के बीच के भाग पर ब्लड की एक बूँद रखते है।
  • Slide with Blood Drop
    अब एक साफ और बराबर किनारों वाले स्प्रीडर की सहायता से स्लाइड पर 35-40 डिग्री पर झुकाकर ब्लड से छुआते है जब ब्लड फैलने लगता है तब उसे स्लाइड पर आगे घसीटते है।
  • इस प्रकार ब्लड स्मीयर बनकर तैयार हो जाता है अब स्मीर को सूखने के लिए छोड़ देते है।
  • Blood Smear
     स्मीर के सूखने के बाद स्लाइड स्टेनिंग के लिए तैयार हो जाता है।





!  Thank You  !

Wednesday, 19 July 2017

Total R.B.C. Count Test by Neubauer Chamber


Total R.B.C. Count test बहुत  महत्वपूर्ण  Blood test है जिसमें लाल रक्त कोशिकाओं की संख्या को गिना जाता है।
लाल रक्त कोशिकाएँ हमारे शरीर के ऊतकों में आँक्सीजन का परिवहन करती है।

Requirement –
  • Neubauer Chamber



  • R.B.C. Pipette



  • R.B.C. Diluting fluid



  • Cover slip
  • EDTA Blood Sample
  • Microscope


Procedure –
  • सबसे पहले Neubauer Chamber को Swab की सहायता से साफ करते हैं।
  • अब R.B.C. Pipette जिसके बल्ब में लाल रंग का छोटा सा boll स्थित होता है में 0.5 mark तक ब्लड लेते हैं।



  • अब उसी  R.B.C. Pipette  में 101 mark तक R.B.C. Diluting fluid लेते है और Pipette के बल्ब में ब्लड और R.B.C. Diluting fluid को 5 मिनट तक अच्छे से mix करते हैं।



  • अब Neubauer Chamber पर साफ Cover slip रखते है।


  • अब Pipette से शुरूआत के एक या दो बूँद Discard कर देते हैं और फिर Chamber और  Cover slip के बीच मिक्सचर की एक बूँद डालकर Chamber को Charge कर लेते है।


  • अब Neubauer Chamber के बीचों बीच मौजूद स्क्वायर के किनारों के चार और बीच के एक खानों (कुल 5 स्क्वायर) को microscope की सहायता से Examine करते हैं और Red Blood Cells को count  करते है।


Calculation –
  •  Total R.B.C. Count cell/cubic mm   = (4000/80×200)×Number of cells counted from 5 large square


     जहाँ – 4000/80 = Volume from which the cells have been counted
        200 = Dilution Factor
                                                                OR
  •  Total R.B.C. Count    = 10,000× Number of cells counted from 5 large square



Normal values –
  • In Male = 4.7 – 6.1 million cells/microliter
  • In Female = 4.2 – 5.4 million cells/microliter



If Increased -
  1. Fatigue (थकान होना)
  2. Shortness of Breathing (श्वास फूलना)
  3. Join Pain (जोड़ों में दर्द होना)
  4. Tenderness  in Palm of Hands and sole of the Feet (हथेलियों एवं पंजों में पीड़ा होना)
  5. Itching Skin (त्वचा में खुजलाहट होना)
  6. Sleep Disturbance (अनिद्रा)
Increased RBC count को एरिथ्रोसाइटोसिस कहते है। कुछ कन्डीशन में या बीमारी की वजह से रक्त में इनकी संख्या अत्यधिक बढ़ जाती है जैसे
  1. Cigarette Smoking की वजह से RBC count बढ़ जाता है।
  2. Congenital Heart Disease में RBC count बढ़ जाता है।
  3. Dehydration में RBC count बढ़ जाता है।
  4. Renal Cell Carcinoma (Kidney Cancer) में RBC count बढ़ जाता है।
  5. Pulmonary Fibrosis में RBC count बढ़ जाता है।
  6. Polycythemia Vera (A Bone Marrow Disease That Cause Over Production of RBC’s) में RBC count बढ़ जाता है।
  7. कुछ दवाएं जैसे Gentamicin and Methyle Dopa  के कारण भी RBC count बढ़ जाता है।


If Dicreased-
  1. Fatigue (थकान होना)
  2. Shortness of Breath (श्वास फूलना)
  3. Dizziness (चक्कर आना), Weakness (कमजोरी आना) 
  4. Increased Heart rate
  5. Headaches (सरदर्द होना) 
  6. Pale Skin (त्वचा में पीलापन)


Decreased RBC Count को एनिमिया कहते है। कुछ बीमारियों की वजह से रक्त में इनकी संख्या घटकर अत्यधिक कम हो जाती है जैसे
  1. Anemia में RBC count कम हो जाती है।
  2. Bone marrow failure होने में RBC count कम हो जाती है।
  3. Erythropoietin Deficiency (Chronic Kidney Disease) में RBC count कम हो जाती है।
  4. Transfusions and Blood Vessel Injury के कारण Hemolysis or RBC Destruction हो जाता है जिसके कारण RBC count कम हो जाती है।
  5. Internal Bleeding or External Bleeding के कारण RBC count कम हो जाती है।
  6. Malnutrition में RBC count कम हो जाती है।
  7. Multiple Myeloma (Cancer of Plasma Cells in bone Marrow) में RBC count कम हो जाती है।
  8. Nutritional Deficiency में जैसे Iron, Copper,Folate and Vitamin B6, B12 में RBC count कम हो जाती है। Pregnancy में RBC count कम हो जाती है।
  9.  Thyroid Disease में RBC count कम हो जाती है।
  10. कुछ दवाओं की वजह से भी RBC Count  कम हो जाती है जैसे Chemotherapy Drugs, Chloramphenicol (treat Bacterial Infection), Quinidine (treat Irregular Heart beat),Hydantoins (treat  Epilepsy)




!! Thank you !!

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Wednesday, 5 July 2017

Manually TLC/Total W.B.C.Count Test by Neubauer Chamber



Introduction -

TLC/Total WBC Count test एक  Blood test है जिसमें सफेद रक्त कोशिकाओं की संख्या को गिना जाता है।
 सफेद रक्त कोशिकाएँ हमारे शरीर को रोग-प्रतिरोधक क्षमता प्रदान करती है जो किसी बीमारी या इन्फेक्शन से हमारे शरीर की रक्षा करते हैं।

Requirement –
Neubauer Chamber
W.B.C. Pipette
W.B.C. Diluting fluid
TLC Test Kit
Cover slip
EDTA Blood Sample
Microscope
Microscope

Procedure –
  1. सबसे पहले Neubauer Chamber को Swab की सहायता से साफ करते हैं।

  2. अब W.B.C. Pipette जिसके बल्ब में सफेद रंग का छोटा सा boll स्थित होता है में 0.5 mark तक ब्लड लेते हैं।
    W.B.C. Pipette with White Boll
    Taking blood sample 
  3. अब उसी  W.B.C. Pipette  में 11 mark तक W.B.C. Diluting fluid लेते है और Pipette के बल्ब में ब्लड और W.B.C. Diluting fluid को 5 मिनट तक अच्छे से mix करते हैं।

    Add W.B.C. Diluting Fluid
    Mixing Mixture in Pipette Bulb
  4. अब Neubauer Chamber पर साफ Cover slip रखते है।
    Put cover slip 
  5. अब Pipette से शुरूआत के एक या दो बूँद Discard कर देते हैं और फिर Chamber और  Cover slip के बीच एक Drop डालकर Chamber Charge कर लेते है।
    Charging Neubauer Chamber
  6. अब Neubauer Chamber में मौजूद किनारों के चार खानों को microscope की सहायता से Examine करते हैं और W.B.C. count  करते है।
    Four large square of Neubauer chamber
    W.B.C. in a square


Calculation –

 T.L.C. or Total W.B.C. Count    = 10/4×20×Number of cells counted from 4 large square

Where - 
  • 10/4 = Volume from which cells have been counted
  • 20 = Dilution Factor 


                                                                OR
T.L.C. or Total W.B.C. Count    = 50× Number of cells counted from 4 large square
Normal values –
  • Adult and Child = 4000 – 11000 cells/cubic mm
  • Child under 2 years = 6200 – 17000 cells/cubic mm
  • Newborn = 9000 – 30000 cells/cubic mm


 If Increased W.B.C. Count-
          
Increased WBC count को ल्यूकोसाइटोसिस कहते है। कुछ कन्डीशन में या बीमारी की वजह से रक्त में इनकी संख्या अत्यधिक बढ़ जाती है Up to 11000cell/cubic mm जैसे –
  1. Bacterial Infection में WBC count बढ़ जाता है।
  2. Trauma and Stress के कारण WBC count बढ़ जाता है।
  3. Hemorrhage में WBC count बढ़ जाता है।
  4. Dehydration में WBC count बढ़ जाता है।
  5. Steroid Therapy में WBC count बढ़ जाता है।
  6. Inflammations में WBC count बढ़ जाता है।
  7. Thyroid hormone के बढ़ जाने के कारण भी WBC count बढ़ जाता है।
  8. Leukaemias में W.B.C. count बढ़ जाता है।



If Decreased W.B.C. Count-

Decreased W.B.C. Count को ल्यूकोपीनिया कहते है। कुछ कन्डीशन में या बीमारी की वजह से रक्त में इनकी संख्या घटकर अत्यधिक कम हो जाती है Less then 4000cell/cubic mm जैसे –
  1. Cytotoxic drugs के कारण W.B.C. count कम हो जाती है।
  2. Bone marrow failure होने में W.B.C. count कम हो जाती है।
  3. Sever Infection में W.B.C. count कम हो जाती है।
  4. Iron deficiency and Vit. B12 deficiency में W.B.C. count कम हो जाती है।
  5. Hypersplenism में W.B.C. count कम हो जाती है।
  6. Autoimmune diseases में W.B.C. count कम हो जाती है।
  7. Some Diseases like Typhoid fever, Malaria, Dengue,Influenza में W.B.C. count कम हो जाती है।
  8. Tuberculosis में W.B.C. count कम हो जाती है।



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